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सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बागबाहरा  

Where creativity thrives and artistic expression knows no bounds. Join us to unlock your potential through our immersive art programs designed for all levels.

हमारे बारे मे 

सषिमं बागबाहरा की विकास यात्रा एक नजर में

सा विद्या या विमुक्तये, बहुजन हिताय बहुजन सुखाय और राष्ट्रवाद के प्रखर संस्कारों से युक्त पीढ़ी निर्माण की दृष्टि से 1952 में गोरखपुर से प्रारंभ हुए सरस्वती शिशु मंदिरों की एक अटूट श्रृंखला आज पूरे देशभर में काम कर रही है। अविभाजित मध्यप्रदेश में इसका बीजारोपण करने का श्रेय हम सबके श्रद्धेय स्व. रोशनलाल जी सक्सेना को जाता है। उनके विचारों से प्रेरित होकर ही विद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष रहे स्व. श्री सागरचंद अग्रवाल जी के सुपुत्र एवं अविभाजित म.प्र. के शिक्षा मंत्री रहे डॉ रमेश जी, डॉ. सुरेश जी, स्व. श्री रामसिंग सोनी जी, विख्यात चिंतक, लेखक और पत्रकार श्री देवकृष्ण पुरोहित जी, शिक्षाविद् प्राध्यापक श्री शंभूप्रसाद ब्यौहार जी, श्री गोपालदास व्यास जी, श्री नंदकिशोर अग्रवाल जी एवं श्री कांशीराम जी कुंजेकार के सद्प्रयासों एवं अविष्मरणीय योगदान के चलते 15 अगस्त 1978 को बागबाहरा के इस विद्यालय का शुभारंभ श्री कांशीराम जी कुंजेकार के बाड़ा में हुआ। अविभाजित मध्यप्रदेश में इस विद्यालय को रायपुर संभाग का प्रथम विद्यालय होने का भी गौरव प्राप्त है। इस विद्यालय के प्रथम प्रधानाचार्य श्री रामाश्रय सिंह जी ने श्री रूपनारायण सिंहा जी एवं श्रीमती बदरा शर्मा जी के साथ मिलकर इस छोटे से पौधे को सींचकर बटवृक्ष बनाने की निश्चय किया जिनमे श्रीमती गोपीबाई आया दीदी ने भी इनका बखूबी साथ निभाया।  आज यह वटवृक्ष बागबाहरा में लगभग चार दशकों से सरस्वती शिशु मंदिर संस्कार और अनुशासन के साथ ज्ञान का प्रकाश फैलाने के अपने दायित्व का निर्वहन कर रहा है। सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना के केन्द्र को उद्देश्य मानकर प्रारंभ किये गए इस विद्यालय का संचालन पूर्व में स्व. मोरेश्वर राव गद्रे स्मृति शिक्षा समिति के द्वारा संचालित किया जा रहा था। आगे चलकर स्थानीय संस्थापक सदस्यों को मिलाकर स्वर्गीय श्री सागरचंद अग्रवाल स्मृति शिक्षा समिति गठित किया गया जिसके द्वारा संचालित यह सरस्वती शिशु मंदिर आज 40 वर्षो से क्रमशः प्रगतिशील है। प्रारंभ में यह विद्यालय मात्र प्राथमिक शिक्षा तक के उद्देश्यों के लक्ष्य से प्रेरित होकर संचालित हुआ था, किन्तु समाज के स्नेहमय सहयोग का सम्मान करते हुए यहां उच्चतर माध्यमिक तक की शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

विद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष स्व. श्री सागरचंद जी अग्रवाल की सद्भावना इस विद्यालय के इतिहास में अविस्मरणीय रहेगी। प्रारंभ से चली आ रही वाहन व्यवस्था को उन्होेंने स्वर्गारोहण के कुछ ही दिनों पूर्व जो नया रूप दिया वह स्थानीय परिस्थति के अनुसार विशेष महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ जिसमें सभी अभिभाववकों ने वर्षभर का शुल्क एकमुश्त जमा कर इस विद्यालय के विकास में सहयोग किया जिससे वाहन व्यवस्था सुलभ हो सकी। इसके पूर्व सत्र 1985-86 में विद्यालय भवन की बिखरी हुई व्यवस्था को सामूहिक रूप देने का प्रयास संचालक मंडल ने किया जिसमें स्व. श्री सागरचंद जी अग्रवाल के असीम सहयोग से विशेष सफलता मिली और स्व. श्री रामहरख तिवारी जी ने विद्यालय भवन निर्माण कर इसमें सहयोग प्रदान किया। स्वर्गीय श्री रामसिंह सोनी एवं स्वर्गीय श्री देवकृष्ण पुरोहित जी के विशेष प्रयासों से श्री जगन्नाथ जी सेे 11 एकड़ भूमि को क्रय करने में विद्यालय ने सफलता हासिल की। इस प्रकार हमारा विद्यालय क्रमशः मूलभूत आवश्यकताओं के निराकरण हेतु सतत् प्रयत्नशील रहा। तत्कालीन क्षेत्रीय प्रचारक रहे आदरणीय श्री श्रीगोपाल व्यास जी का भी स्नेह सदैव इस विद्यालय को प्राप्त होते आया है, जिन्होनें राज्यसभा संासद बनने के पश्चात इस विद्यालय के भवन निर्माण में सहयोग कर महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। शिक्षा के मूलभूत स्तंभ शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक विकास को लक्ष्य में रखकर भैया/बहिनों के समुचित विकास के प्रति विद्यालय, निष्ठापूर्वक प्रयत्नशील है। शैक्षिक विकास के क्षेत्र में यह विद्यालय स्थानीय किसी संस्था से पीछे नहीं है। यहां के भैया/बहिनों ने बोर्ड कक्षाओं में जिला, संभाग एवं प्रांत स्तर पर सम्मानजनक स्थान बनाया है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद सत्र 2000-2001 के हाई स्कूल सर्टीफिकेट परीक्षा (कक्षा 10 वीं) की परीक्षा में नगर के शिक्षक श्री रूपेश तिवारी की सुपुत्री कुमारी उन्नति तिवारी ने सबसे पहले प्रावीण्य क्रम में स्थान अर्जित कर विद्यालय और नगर का गौरव बढ़ाया था। उल्लेखनीय है कि तब उन्नति ने अविभाजित मध्यप्रदेश की घोषित प्रावीण्य सूची में दूसरा और छत्तीसगढ़ की घोषित प्रावीण्य सूची में पहला स्थान अर्जित किया था। उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि इसी सत्र की इस बोर्ड परीक्षा में विद्यालय के चार और भैया बहिनों ने भी प्रावीण्य क्रम में अपना स्थान दर्ज किया था। इसी तरह गत सत्रों में अपने विद्यालय से कक्षा दशम् बोर्ड की प्रावीण्य सूची में भैया भूपेन्द्र ध्रुव का स्थान रहा साथ ही अपने भूतपूर्व छा़त्र/छात्रा बहिन वंदना टाटिया, श्वेता साहू, कीर्ति देवांगन, आनंदप्रकाश अग्रवाल, लक्ष्मीकांत यदु, मुकेश देवांगन, , अलका यादव, सुप्रिया गुप्ता, माया चंद्राकर, अर्जिता वर्मा, रितिका सिंह आदि पर विशेष गर्व है। उसी तरह बौद्धिक शिक्षण के अंतर्गत इस विद्यालय ने सफलता के नये आयाम अर्जित किये हैं। वर्ष 1988-89 में डॉ हेडगेवार जन्म शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में भोपाल व रायपुर में आयोजित शिशु संगम के कार्यक्रम में विद्यालय से 75 भैया/बहिनों को सम्मिलित करवाया। इनमें भैया अभिषेक शर्मा ने चित्रकला प्रतियोगिता (डॉ हेडगेवार) में प्रांत स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया वहीं बहिन गुरप्रीत कौर छाबड़ा ने ( दीवावली, रक्षाबंधन, होली) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर होते हुए और अपनी भौतिक आवश्यकताओं को पूर्ण करते हुए शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ ज्ञान, चारित्र्य, एकता और संस्कारों की अलख जगाते हुए विद्यालय ने वर्ष 2007 में अपना रजत जयंती वर्ष मनाया जिसमें बतौर मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती वीणा सिंह उपस्थित रहीं। छत्तीसगढ़ प्रांत के प्रांत प्रचारक रहे मा. शांताराम जी सराफ का भी विशेष स्नेह इस विद्यालय को प्राप्त हुआ जिन्होंने समय-समय पर उपस्थित होकर आचार्यो एवं समिति के सदस्यों का उत्साहवर्धन कर विद्यालय विकास के लिए प्रेरित किया। इस विद्यालय में मुख्य आकर्षण का केन्द्र है प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव जिसे विद्यालय प्रतिवर्ष वार्षिक उत्सव के रूप में आयोजित करता है, विद्यालय के वार्षिक उत्सव का इंतजार बागबाहरा के प्रत्येक नगरवासियों को रहता है। उक्त कार्यक्रम में पूरा बागबाहरा सशिमं में नजर आता है। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले संस्थान के कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर सम्मानजनक स्थान प्राप्त करते आ रहे हैं। इस क्रम में इस विद्यालय के आचार्य भी पीछे नहीं रहे हैं विद्याभारती द्वारा आयोजित अखिल भारतीय निबंध प्रतियोगिता में दीदी रजनी बाजपेयी ने प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय को गौरवान्वित कर चुकी है। शारीरिक शिक्षा के अंतर्गत यहां के भैया/बहिन प्रति वर्ष विभाग, प्रांत, क्षेत्र, अखिल भारतीय एवं एस. जी. एफ.आई. स्तर की क्रीड़ाओं में सम्मानजनक स्थान बनाते हुए भाग लेते आ रहे हैं। ऐसे प्रतिभागियों में हमें भैया राजेश सोनी, बहिन मनीषा श्रीवास्तव, बहिन तारामती वैष्णव, बहिन प्रांजलि शुक्ला, बहिन प्रशस्ति शुक्ला, बहिन बरखा मानिकपुरी, बहिन सीमा सााहू, भैया नीतेश साहू, बहिन भुनेश्वरी ध्रुव, बहिन थनेश्वरी निषाद, गीतांजलि साहू एवं भैया भूपेन्द्र धुव की दक्षता पर विशेष गर्व है।

इसी तरह विनायक राव शेण्डे जी के मार्गदर्शन में श्रद्धेय स्व. देवकृष्ण जी पुरोहित और श्रद्धेय स्व. शंभू प्रसाद ब्यौहार जी के अथक प्रयासों से अविभाजित मध्यप्रदेश का पहला ग्रामीण विद्यालय इसी विकासखण्ड के ग्राम घुंचापाली में सन् 1990 में प्रारंभ हुआ था। इस परिकल्पना को विद्याभारती के प्रांतीय, क्षेत्रीय और अखिल भारतीय अधिकारियों ने सराहनीय बताया आगे चलकर इसी विकासखण्ड के ग्राम कसेकेरा में सन् 1995 में आवासीय विद्यालय प्रकल्प प्रारंभ हुआ। इस प्रकल्प को  श्रद्धेय स्व. कृष्णचन्द्र जी गांधी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। श्रद्धेय स्व. देवकृष्ण जी पुरोहित और श्रद्धेय स्व. शंभू प्रसाद ब्यौहार जी के इस दिशा में किये गये प्रयासों को तत्कालीन क्षेत्रीय संगठन मंत्री आदरणीय श्री रोशन लाल जी सक्सेना और तत्कालीन प्रादेशिक सचिव आदरणीय श्री सत्यनारायण जी अग्रवाल का प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। इन तपस्वी कार्यकर्ताओं के योगदान का पुण्य स्मरण कर हम सब सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो जाते हैं।  यह विद्यालय 30 छात्रों की दर्ज संख्या के साथ किराए के मकान में प्रारंभ होकर समाज के स्नेह व सहयोग से शनैः शनैः प्रगति के पथपर अग्रसर होते हुए आज यह 850 छात्रों का एक विशाल वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है। प्रारंभ से ही यह विद्यालय कई उतार चढ़ाव को पार करते हुए आज इस मुहाने पर खड़ा है। किराये के मकान में प्रारंभ हुए इस विद्यालय के पास आज लगभग 1.5 करोड़ रूपए स्वयं का दो मंजिला इमारत है, जिसमें 26 अध्यापन कक्ष, विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर प्रयोगशाला, प्राचार्य कक्ष, कार्यालय कक्ष, स्टाफ कक्ष एवं वाचनालय है। कम्प्यूटर की महत्ता को समझते विद्यालय संचालन समिति ने सन् 2002 से निरंतर इस विद्यालय में कम्प्यूटर शिक्षा का पाठ्यक्रम संचालित है जो कि भैया-बहिनों के सर्वागीढ़ विकास में सर्वाधिक लाभदायक सिद्ध हो रहा है। वहीं 2018 समय की मांग के आधार पर प्राचार्य ने चिंता करते हुए आधुनिकीकरण के युग में स्मार्ट क्लास को दृष्टिगत रखते हुए स्क्रीन प्रोजेक्टर की सुविधा उपलब्ध कराई, जिससे प्रति शनिवार प्रार्थना सभा संचालित हो रहा है। इसके साथ ही शिशु वाटिका के बच्चों को कहानी के माध्यम से नैतिक शिक्षा के विकास हेतु प्रोजेक्टर की सहायता से पंचतंत्र की कहानियां, नृत्यकला, संगीतकला की शिक्षा दी जाती है। शिक्षण सत्र 2017-18 एवं 2018-19 में समाज की शिक्षित किन्तु आर्थिक स्तर पर पिछ़ड़ी महिलाओं के विकास हेतु निःशुुल्क कम्प्यूटर शिक्षा का पाठ्यक्रम संचालित किया गया, जिसका विद्यालय को अच्छा प्रतिसाद प्राप्त हुआ। बच्चों में नेतृत्व क्षमता के विकास हेतु प्रतिवर्ष शिशु भारती, बाल भारती, कन्या भारती, किशोर भारती का गठन कर विभिन्न कार्यक्रमों में दायित्व सौंपकर बहुमुखी विकास करने का कार्य किया जा रहा है।   प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा संचालित स्वच्छ भारत कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों के माध्यम से समाज में जागरूकता लाने हेतु विद्यालय में स्वच्छता परिषद् का गठन किया गया है, जिसका विद्यालय की साफ-सफाई एवं वृक्षारोपण में महत्वपूर्ण योगदान है। इसके अलावा मेधावी छात्र परिषद्, श्री रामानुजन गणित परिषद्, जगदीशचन्द्र बसु विज्ञान परिषद् का गठन किया गया है जिससे कि विज्ञान एवं गणित विषय को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

सन् 15 अगस्त 1978 से संचालित इस विद्यालय के प्रथम प्राचार्य होने का गौरव श्री रामाश्रय सिंह जी को प्राप्त हुआ, जिनके मार्गदर्शन से इस विद्यालय का उत्तरोत्तर विकास कार्य संचालित है।  इसके पश्चात् क्रमशः प्राचार्य के पद पर श्री कंुजबिहारी सोनी, श्री रविन्द्र कुमार शर्मा, श्री विनोद मिश्रा श्री सुशील कुमार कानूनगो, श्री नितिन परमार, श्रीमती तारा शर्मा, श्री रामकृष्ण साहू एवं वर्तमान प्राचार्य श्री त्रिलोचन लाल साहू जी के नेतृत्व में यह विद्यालय निरंतर प्रतिशील है। वर्तमान प्राचार्य श्री त्रिलोचन लाल साहू जी के अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि इस वर्ष 17 भैया बहनों का चयन खेलकूद में एसजीएफआई स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ है वहीं विभिन्न महापुरूषों की जयंतियां भी मनार्इ्र जाती है ताकि इनके योगदान एवं बलिदानों से प्रेरित होकर बच्चों में देशप्रेम की भावना का विकास हो एवं सामाजिक हित के कार्यों के लिए तत्पर हो। शिशु वाटिका के विकास हेतु शिशु विभाग का गठन कर शिशु स्त्र पर ही विभिन्न शैक्षिक गतिविधियां, मिट्टी से कलाकृति, चित्रकला कार्य, ठप्पा कार्य एवं खेलकूद का आयोजन किया जाता है। पूर्व राज्यसभा सांसद श्री ओ. राजगोपालन जी व श्री श्रीगोपाल व्यास जी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह की धर्मपत्नी श्रीमती वीणसिंह जी और पूर्व विधायक प्रीतमसिंह दीवान जी ने भी आर्थिक रूप से सहायता कर इस विद्यालय की भवन व अन्य आवश्यकताओं को पूर्ण करने में उदार होकर सहयोग किया। पहले विद्यालय के संस्थापक सदस्यों में स्व. शंभूप्रसाद ब्यौहार जी और उसके बाद 2007 में विद्यालय संचालन समिति के सचिव और विद्यालय व्यवस्थापक के तौर पर श्री अनिल पुरोहित जी के कार्यकाल में इस विद्यालय के भवन ने भव्य स्वरूप ग्रहण किया। श्री अनिल पुरोहित के सुलझे हुए दृष्टिकोण और विद्यालय की आवश्यकता को देखते हुए विद्यालय के पहले माले पर एक सभा कक्ष का निर्माण भी हुआ जिसमें विद्यालय संबंधी विभिन्न कार्यक्रम निर्विघ्न संपन्न हो रहे हैं। संभवतः यह पहला उदाहरण होगा कि किसी विद्यालय में अध्यापनरत आचार्यो-दीदीजी और अन्य सेवारत वाहन चालकों-भृत्यों को प्रतिवर्ष दीपावली के मौके पर सम्मान स्वरूप बोनस राशि प्रदान की जाती है। यह परंपरा श्री अनिल पुरोहित जी के कार्यकाल में प्रारंभ हुई और पिछले 10 वर्षो से अनवरत जारी है। शैक्षिक गुणवत्ता के प्रति सचेष्ट श्री अनिल पुरोहित जी ने विद्यार्थियों व विद्यालय के आचार्यो व दीदीजी की छोटी-छोटी आवश्कताओं को पूर्ण करने में विशेष रुचि ली। श्री पुरोहित के कार्यकाल में प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा को भेंट किए जाने वाला आचार्य वेश संचालन समिति की ओर से सिलवाकर दिया जाता है जो अपनी एकरूपता के कारण छत्तीसगढ़ में विभिन्न विद्यालयों में सराहा गया है।

वर्तमान में विद्यालय संचालन समिति के सचिव व व्यवस्थापक के रूप में श्री जोगेन्द्रसिंह जी दायित्व निर्वहन कर रहे हैं। समिति, प्राचार्य एवं समस्त आचार्यो के निरंतर प्रयासों की बदौलत ही आज यह विद्यालय नगर के सबसे समृद्ध विद्यालयों में से एक है। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमांे के आयोजन में अतिथि के रूप में नगर के प्रतिष्ठित व्यक्ति एवं गणमान्य नागरिकों से लेकर नगर के थाना प्रभारी, अनुविभागीय अधिकरी, आईएएस, अधिकारी, भूतपूर्व सैनिकों एवं समाज के उत्थान के कार्य में लगे व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है।  इसके साथ ही विद्यालय में हो रही विभिन्न गतिविधियां समाचार पत्रो में प्रमुखता से प्रकशित होती हैं। हमें यह स्पष्टतः स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है कि शिक्षा के मूलभूत उद्देश्य संस्कार एवं नैतिक पक्ष के समुचित विकास के पथ पर हम अभी बहुत पीछे हैं। इस दृष्टि से सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय योजना के तहत प्रतिवर्ष मकर सक्रांित और वसंत पचंमी के पर्व पर अन्न और धन संग्रह किया जाता है, जिसे वनवासी क्षेत्रों में निःशुल्क विद्यालयों के संचालन में उपयोग किया जाता है। विद्यालय द्वारा इस क्षेत्र में किए गए प्रयासों का आत्म निरीक्षण करने पर अवगत होता है कि शिक्षा के इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु हम निरंतर प्रयासरत हैं और इस दिशा में हमें और बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।

Our Core Values

Creativity

We encourage bold ideas and experimentation, fostering a nurturing environment for all artists.

Community

We believe in the power of connection, providing a supportive space for artists to collaborate and grow.

Growth

We are committed to helping our students evolve in their skills and artistic vision.

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The Individual Art School provided me with the skills and confidence I needed to pursue my passion for art. The instructors are knowledgeable and supportive.

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Thanks to Individual, I discovered my unique style and artistic voice! The atmosphere is inspiring and I felt right at home.

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